आप ने क्या कभी यह सोचा है कि धर्म का शुरुआत कब और कैसे हुआ। आप में से कुछ लोग कहेंगे हां और कुछ लोग न कहेंगे, तो चलिए हम इस विषय को समझने की कोशिश करते हैं। आप ने कभी प्रागैतिहासिक मनुष्य समाज के जीवन को अनुभव करने का कोशिश किया है? उस समय का मनुष्य एक छोटे बच्चे जैसा था, जिसे बहुत कुछ नहीं पता था। जो एक जंगली समाज कह सकते हैं, वहां उस समय कोई भी सुविधा नहीं थी। मनुष्य जानवरों की तरह रहता था, उसे जब भूख लगती थी तो वह शिकार कर लेता था और उसी सब कार्यों में खुश रहता था। उसी समय बहुत सी प्राकृतिक घटनाएं घटती थी, जैसे बिजली का कड़कना, खूब वर्षा होना आदि आदि प्राकृतिक घटनाएं, जिससे मनुष्य भयभीत रहता था। वह इस अज्ञानता को लेकर डरा रहता था। उस समय भी बहुत सी बीमारियां होती थी जिससे लोग मरते थे, उससे भी लोग भयभीत होते थे। प्रसिद्ध मानवशास्त्री एडवर्ड बर्नेट टायलर भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि धर्म का सबसे प्रांरभिक रूप 'एनिमिज्म' या सर्वप्राणवाद था, जहाँ मनुष्य बिजली, वर्षा और तूफान जैसी प्राकृतिक शक्तियों में किसी अदृश्य चेतना या आत्मा की उपस्थिति मानकर भयभीत होता था।

दुनिया भर के इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं कि प्रागैतिहासिक मनुष्य प्राकृतिक घटनाओं से डरा रहता था। उस समय के मनुष्य के मन में यह रहस्य बना रहता था—यह सूरज, चांद, वर्षा, बिजली का कड़कना, बीमारी का लगना। जिसके जवाब वह खोजने की कोशिश करता था, लेकिन कई बार इन सवालों का जवाब नहीं मिलता था। इस भय और रहस्य से मुक्ति पाने के लिए मनुष्य ने प्रतीकों का सहारा लिया, जिसका प्रमाण हमें फ्रांस की शोवे और स्पेन की अल्तामिरा गुफाओं में बने लगभग 30,000 वर्ष पुराने चित्रों में मिलता है, जहाँ मनुष्य शिकार और प्राकृतिक आपदाओं के भय को शांत करने के लिए शुरुआती अनुष्ठान किया करता था।

जो व्यक्ति उनके इन सवालों को समझा देता था या उसके मन को शांत कर देता था, उसको वह बहुत सम्मान की नजर में देखते थे। इसी पर किसी विद्वान ने कहा है, "दुनिया का पहला धर्म गुरु वह रहा होगा जिसने अपने पड़ोसी गुफा निवासियों को आसमानी बिजली कड़कने का कारण समझाया होगा।" पुरातात्विक इतिहास भी इस तथ्य का समर्थन करता है; तुर्की में स्थित लगभग 12,000 वर्ष पुराना 'गोबेकली तेपे' स्थल इस बात का प्रमाण है कि मानव ने स्थायी घर और खेती बाड़ी शुरू करने से भी पहले संगठित रूप से एक स्थान पर एकत्र होकर धर्मगुरुओं के विचारों को सुनना और अनुष्ठान करना शुरू कर दिया था।

धर्म की परिकल्पना पहली बार इसी प्रकार हुआ होगा। मनुष्य में भय और अज्ञानता था जिससे वह बहुत अशांत रहा करता होगा। पहली बार किसी मनुष्य ने उसे समझाया होगा कि यह जो हो रहा है, इस कारण से हो रहा है। उसी की बहुत सी चिंताओं का समाधान हुआ होगा और मनुष्य का मन शांत हुआ होगा। मृत्यु और बीमारी के रहस्य को समझने की इसी मानवीय छटपटाहट का ऐतिहासिक साक्ष्य हमें इराक की शैनिदार गुफा में मिलता है, जहाँ लगभग 1,000,000 वर्ष पूर्व नियंडरथल मानव अपने मृतकों को सम्मानपूर्वक फूलों और औजारों के साथ दफनाते थे ताकि परलोक और आत्मा से जुड़े भय को शांत किया जा सके।

जिससे वह मनुष्य उन विचारों के प्रति श्रद्धावान हुआ होगा। उसको इन बातों से अपनी सभी चिंताओं को दूर करने का रास्ता मिला होगा। धीरे-धीरे इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में धर्म का प्रवेश हुआ। और आज का भी आधुनिक काल मनुष्य जब अशांत हो जाता है तो वह धर्म और आध्यात्म के शरण में जाता है। और धर्म उसके मन की अशांति को दूर कर उसे शांत कर देता है। धर्म का इतिहास इसी प्रकार शुरू होता है।