राजस्थान में IAS-IPS दंपति की 40 संपत्तियों की खरीद पर विवाद, ACB जांच को सरकार की मंजूरी; जानिए पूरा मामला
राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था में उस समय हलचल मच गई, जब वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर के परिवार की ओर से खरीदी गई 40 विला और कॉटेज का मामला सामने आया। आरोप है कि इस दंपति और उनके परिवार के सदस्यों ने उदयपुर और अलवर के अनंता रिसॉर्ट में बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर संपत्तियां खरीदीं और बाद में इन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया, जिससे ये संपत्तियां खरीदी गई थीं।
इस मामले ने न केवल राजस्थान की नौकरशाही, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। संपत्तियों की खरीद, उनसे होने वाली सालाना लीज आय और एक निजी कंपनी को दिए गए कथित सरकारी लाभों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी। आइए जानते हैं इस पूरे प्रकरण की प्रमुख बातें।
1. उदयपुर और अलवर में खरीदी गईं कुल 40 संपत्तियां
मीडिया रिपोर्ट्स और ACB की प्रारंभिक जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने करीब ढाई साल के दौरान दो अलग-अलग स्थानों पर कुल 40 संपत्तियां खरीदीं।
उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर 2023 में उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे गए थे। शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर ने 10-10 कॉटेज अपने नाम पर खरीदे। प्रत्येक कॉटेज की रजिस्ट्री कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है। इनकी रजिस्ट्री 29 सितंबर 2023 को हुई थी।
**अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला**
इसके बाद मार्च 2026 में अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे गए। इन संपत्तियों में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर आठ विला, दोनों बेटों के नाम पर चार विला तथा सास-ससुर के नाम पर चार विला होने की जानकारी सामने आई है। शेष चार संपत्तियों के नामवार विवरण का स्पष्ट मिलान उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
इन संपत्तियों की खरीद कीमत लगभग 15 लाख से 16.5 लाख रुपये प्रति विला बताई गई है। इनकी रजिस्ट्री 27 मार्च 2026 को हुई थी।
इस प्रकार उदयपुर के 20 कॉटेज और अलवर के 20 विला मिलाकर कुल 40 संपत्तियां खरीदे जाने का मामला सामने आया है।
2 जिस कंपनी से संपत्तियां खरीदीं, उसी को लीज पर भी दिया
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू संपत्तियों की लीज से जुड़ा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार ने जिन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा, बाद में उन्हीं संपत्तियों को इसी कंपनी को लीज पर दे दिया।
रिपोर्ट्स में सामने आई जानकारी के मुताबिक:
- उदयपुर के 20 कॉटेज से प्रत्येक पर सालाना करीब 4 लाख रुपये लीज राशि तय की गई।
- अलवर के 20 विला से प्रत्येक पर सालाना करीब 5 लाख रुपये लीज राशि तय की गई।
इस हिसाब से उदयपुर के कॉटेज से सालाना 80 लाख रुपये और अलवर के विला से एक करोड़ रुपये की लीज राशि बनती है। यानी कुल मिलाकर करीब 1.80 करोड़ रुपये सालाना लीज आय का आंकड़ा सामने आया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी 40 संपत्तियों की कुल खरीद कीमत लगभग 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है।
3. निजी कंपनी को विशेष आर्थिक पैकेज देने पर भी सवाल
इस पूरे मामले में गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए कथित सरकारी लाभ भी जांच के दायरे में हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मार्च 2026 को राजस्थान के वित्त विभाग की ओर से कंपनी के होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया गया था।
गौर करने वाली बात यह है कि इसी तारीख को अलवर के अजबगढ़ में परिवार के नाम पर 20 विला की रजिस्ट्री भी हुई थी।
ACB इस बात की जांच कर रही है कि निजी कंपनी को दिए गए सरकारी लाभ और अधिकारी तथा उनके परिवार की ओर से की गई संपत्तियों की खरीद के बीच कोई संबंध था या नहीं।
इसके अलावा रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट, आवश्यक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
4. IAS शिखर अग्रवाल को APO किया गया
संपत्ति खरीद का मामला सार्वजनिक होने के बाद राजस्थान सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को APO (Awaiting Posting Orders) कर दिया।
APO का अर्थ है कि अधिकारी को अगले पदस्थापन आदेश तक प्रतीक्षा में रखा गया है।
शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके पास उद्योग, MSME, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण विभागों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी रही हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से जारी आदेश में APO किए जाने का कारण प्रशासनिक बताया गया था। इसलिए इस कार्रवाई को सीधे तौर पर संपत्ति खरीद के आरोपों में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
5. ACB की जांच को राजस्थान सरकार की मंजूरी
30 अक्टूबर 2026 को इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। राजस्थान सरकार ने ACB को शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत जांच की अनुमति दे दी।
ACB की प्रारंभिक पड़ताल में निजी कंपनी को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने, सरकारी पद और प्रभाव के दुरुपयोग तथा राज्य सरकार को संभावित आर्थिक नुकसान पहुंचाने से जुड़े पहलुओं की जांच आवश्यक मानी गई।
ACB अब मुख्य रूप से इन बिंदुओं की पड़ताल करेगी:
1. परिवार के नाम पर खरीदी गई 40 संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी?
2. संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई धनराशि का स्रोत क्या था?
3. संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर देने के पीछे क्या समझौता था?
4. गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष आर्थिक पैकेज और अन्य रियायतें देने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं?
5. क्या किसी सरकारी पद या प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल निजी लाभ पहुंचाने के लिए किया गया?
इसके साथ ही आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में संपत्तियों की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
6. नौकरशाही की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल
IAS और IPS जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
जब किसी वरिष्ठ अधिकारी और उसके परिवार की बड़ी संपत्ति खरीद से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी अधिकारी को जांच पूरी होने और आरोप साबित होने से पहले दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में सामने आए सभी आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संपत्तियों की खरीद और निजी कंपनी को दिए गए कथित सरकारी लाभों के बीच कोई संबंध था? क्या संपत्तियां वास्तव में बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गई थीं? और क्या इस पूरे मामले में प्रशासनिक पद का किसी निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया?
इन सभी सवालों का जवाब ACB की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
राजस्थान का यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता, सरकारी जवाबदेही और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रकरण बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें रहेंगी।
देश, राज्य और प्रशासन से जुड़ी हर बड़ी और निष्पक्ष खबर के लिए जुड़े रहिए D CAPITAL NEWS के साथ।