बदलती जिंदगी के साथ बदल रहा है बीमारियों का चेहरा

कभी संक्रमण और कुपोषण बड़ी चुनौती थे, आज लाइफस्टाइल, प्रदूषण और मानसिक तनाव भी स्वास्थ्य के बड़े खतरे बन गए हैं

स्वास्थ्य की दुनिया पिछले कुछ दशकों में तेजी से बदली है। चिकित्सा विज्ञान ने कई गंभीर बीमारियों की पहचान, जांच और इलाज के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है, लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप भी बदल गया है। जहां पहले संक्रामक रोग, कुपोषण, साफ पानी और स्वच्छता की कमी जैसी समस्याएं बड़ी चिंता थीं, वहीं आज हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा, कैंसर, सांस की बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याएं तेजी से चर्चा में हैं।

आज बीमारी केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी कई ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से अधिक उम्र से जोड़कर देखा जाता था।

बीमारी का बदला हुआ पैटर्न

पहले की तुलना में आज लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। शारीरिक मेहनत कम हुई है और लंबे समय तक बैठकर काम करने, स्क्रीन देखने और अनियमित दिनचर्या का समय बढ़ा है। इसके साथ खान-पान में भी बदलाव आया है।

WHO के अनुसार, कम शारीरिक गतिविधि, अस्वास्थ्यकर खान-पान, तंबाकू और शराब का सेवन गैर-संचारी रोगों यानी NCDs(Non-Communicable Diseases ) हृदय रोग,डायबिटीज ,हाई ब्लड प्रेशर

कैंसर आदि के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।

भारत में भी गैर-संचारी रोग स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। WHO के 2025 के भारत संबंधी प्रोफाइल के अनुसार, वर्ष 2021 में भारत में हुई कुल मौतों में लगभग 49 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों से जुड़ी थीं।

हृदय रोग और डायबिटीज की बढ़ती चिंता

हृदय रोग और डायबिटीज नई बीमारियां नहीं हैं, लेकिन इनके जोखिम और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी है। असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और लंबे समय तक रहने वाला तनाव कई लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं।

यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ केवल बीमारी होने के बाद इलाज पर जोर नहीं देते, बल्कि नियमित जांच और बीमारी की रोकथाम को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

प्रदूषण से बिगड़ती सांस

स्वास्थ्य में बदलाव की कहानी केवल खान-पान और जीवनशैली तक सीमित नहीं है। पर्यावरण और वायु प्रदूषण भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

WHO के अनुसार, वायु प्रदूषण का संबंध स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर, COPD और सांस से जुड़े संक्रमणों जैसी समस्याओं से है।

खासकर बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए खराब हवा लंबे समय तक स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी समस्या वाले लोगों पर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ा ध्यान

स्वास्थ्य का मतलब अब सिर्फ शारीरिक रूप से बीमार न होना नहीं माना जाता। मानसिक स्वास्थ्य भी सार्वजनिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

तनाव, चिंता, नींद की समस्या और काम का दबाव आज की तेज जिंदगी से जुड़े मुद्दे हैं। हालांकि हर तनाव मानसिक बीमारी नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज करने से व्यक्ति के जीवन और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

पिछले वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और बातचीत बढ़ी है। यह बदलाव भी स्वास्थ्य क्षेत्र की बदलती तस्वीर का हिस्सा है।

नई चुनौती: दवाओं का असर कम होना

स्वास्थ्य जगत के सामने एक और गंभीर चुनौती **एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)** है। इसका मतलब है कि कुछ सूक्ष्मजीव उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं जिनसे पहले उनका इलाज किया जा सकता था।

WHO के अनुसार, 2023 में दुनिया भर में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए बैक्टीरियल संक्रमणों में लगभग छह में से एक संक्रमण में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध पाया गया।

इस समस्या के बढ़ने पर सामान्य संक्रमणों का इलाज भी अधिक कठिन हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।

महामारी ने भी बदली सोच

कोविड-19 महामारी ने दुनिया को यह याद दिलाया कि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद संक्रामक रोग आज भी बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं।

महामारी के बाद संक्रमण से बचाव, टीकाकरण, स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी पर दुनिया भर में अधिक ध्यान दिया गया।

इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि स्वास्थ्य केवल व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा व्यापक विषय है।

पहले इलाज, अब रोकथाम पर भी जोर

स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव शायद यही है कि अब केवल बीमारी का इलाज करना ही लक्ष्य नहीं है। बीमारी को होने से पहले रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, बेहतर नींद, तंबाकू से दूरी और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जैसे कदम कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

बदलती बीमारी, बदलती जरूरत

पहले स्वास्थ्य की बड़ी चुनौतियां संक्रमण, कुपोषण, स्वच्छ पानी और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी थीं। आज उन चुनौतियों के साथ जीवनशैली, प्रदूषण, मानसिक स्वास्थ्य और दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध जैसी समस्याएं भी जुड़ गई हैं।

इसलिए आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने केवल नई बीमारियों का इलाज करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि बदलती जीवनशैली और पर्यावरण के बीच लोगों को स्वस्थ रखने की चुनौती भी होगी।