(फोटो क्रेडिट बाय Revsportz)
एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, एथलेटिक्स से शूटिंग और कबड्डी तक छाया तिरंगा
नागोया :- जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों से ही भारत ने अलग-अलग खेलों में पदक हासिल किए हैं और अब खेलों के अंतिम दौर में पहुंचने के साथ भारतीय दल के प्रदर्शन में और तेजी दिखाई दे रही है। 29 सितंबर के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में कुल 53 पदक। हो चुके थे, जिनमें 6 स्वर्ण, 21 रजत और 26 कांस्य पदक शामिल हैं।
भारत के लिए इस एशियन गेम्स की खास बात यह रही है कि पदक किसी एक खेल तक सीमित नहीं रहे। शूटिंग, एथलेटिक्स, कबड्डी, बॉक्सिंग, स्क्वैश, रोइंग और दूसरे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम तक पहुंचकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। खास तौर पर एथलेटिक्स में कई खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ भारतीय खेल जगत के लिए यादगार पल बनाए हैं।
गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास
भारतीय एथलेटिक्स की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में से एक गुलवीर सिंह का प्रदर्शन रहा। गुलवीर ने एशियन गेम्स में 1500 मीटर और 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने के बाद 5000 मीटर में कांस्य पदक भी अपने नाम किया। इस तरह उन्होंने एक ही एशियन गेम्स में मिडिल और लॉन्ग डिस्टेंस स्पर्धाओं में तीन पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बनने की उपलब्धि हासिल की।
गुलवीर के लिए यह सफर आसान नहीं था। कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें कई दौड़ों में उतरना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अलग-अलग दूरी की स्पर्धाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। 25 से 29 सितंबर के बीच चार रेस में हिस्सा लेते हुए उन्होंने तीन पदक जीते। उनका यह प्रदर्शन भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
गुलवीर के अलावा एथलेटिक्स में भारत को कई और पदक मिले। पुरुषों के जेवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि रोहित यादव ने 84.35 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक हासिल किया। यानी एक ही स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना भी इस एशियन गेम्स के खास पलों में शामिल रहा।
महिला 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण
29 सितंबर भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद खास दिन रहा। भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने 3 मिनट 29.69 सेकंड का समय दर्ज किया। पुरुष 4x400 मीटर रिले टीम ने भी कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अलावा मिश्रित 4x100 मीटर रिले में भी भारत ने कांस्य पदक हासिल किया।
महिला रिले की सफलता केवल एक पदक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भारतीय महिला एथलेटिक्स की गहराई को भी सामने रखा। टीम स्पर्धाओं में तालमेल, अंतिम चरण में गति और दबाव के बीच प्रदर्शन ने भारत को स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।
महिलाओं की ऊंची कूद में पूजा सिंह ने कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह एथलेटिक्स में भारत के लिए एक ही दिन में कई पदक आए और पदक तालिका में भारतीय दल की स्थिति मजबूत हुई।
नीरू धांडा ने शूटिंग में रचा नया अध्याय
शूटिंग भारत के पारंपरिक मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी निशानेबाजों ने उम्मीदों को मजबूती दी है। नीरू धांडा ने महिलाओं की ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास बनाया। वह जापान में एशियन गेम्स की महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं।
नीरू का प्रदर्शन इससे पहले टीम स्पर्धा में भी प्रभावी रहा था। महिलाओं की ट्रैप टीम स्पर्धा में नीरू धांडा, आशीमा अहलावत और मनीषा कीर की भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया। भारतीय टीम ने कुल 328 अंक बनाए, जबकि नीरू ने व्यक्तिगत रूप से 125 में से 118 अंक हासिल किए।
इस प्रदर्शन से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय शूटिंग में व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ टीम स्तर पर भी मजबूत प्रदर्शन करने की क्षमता मौजूद है।
कबड्डी में भारत का गोल्डन डबल
भारतीय प्रशंसकों के लिए कबड्डी से आई खबर भी बेहद खास रही। भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक हासिल किया। पुरुष टीम ने फाइनल में ईरान को 40-34 से हराया, जबकि महिला टीम ने भी ईरान को कड़े मुकाबले में 37-34 से मात दी।
दोनों टीमों के स्वर्ण पदक ने भारत के टीम स्पोर्ट्स प्रदर्शन को मजबूती दी। कबड्डी में भारत की सफलता लंबे समय से एशियन गेम्स की पहचान रही है और इस बार भी दोनों टीमों ने फाइनल मुकाबले में दबाव के बीच अपना संयम बनाए रखा।
मैराथन में 44 साल बाद पदक
एथलेटिक्स में सावन बरवाल ने भी इतिहास रचा। उन्होंने पुरुष मैराथन में रजत पदक जीता। उनका समय 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड रहा, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना। इस पदक के साथ भारत ने मैराथन में 44 साल के अंतराल के बाद एशियन गेम्स पोडियम पर वापसी की।
मैराथन जैसी कठिन स्पर्धा में लगातार गति बनाए रखना खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती होती है। सावन का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत रिकॉर्ड के साथ भारत के लिए पदक हासिल किया।
बॉक्सिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने छोड़ी छाप
बॉक्सिंग रिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन पदक की दौड़ में महत्वपूर्ण रहा। नरेंद्र बरवाल ने पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। सेमीफाइनल में उन्हें कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे से 0-5 के फैसले से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण बरवाल के खाते में कांस्य पदक आया।
भारतीय मुक्केबाजों से प्रतियोगिता के अंतिम दिनों में भी पदक की उम्मीदें बनी हुई हैं। 30 सितंबर के कार्यक्रम में भारत के कई मुक्केबाज सेमीफाइनल मुकाबलों में उतरने वाले हैं।
कई खेलों से आई पदकों की खबर
भारत की पदक यात्रा केवल एथलेटिक्स, शूटिंग और कबड्डी तक सीमित नहीं रही। स्क्वैश, रोइंग, वुशू, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए हैं। शुरुआती दिनों में स्क्वैश के मिश्रित युगल में जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार ने कांस्य पदक जीता। वहीं शूटिंग और रोइंग में भी भारतीय दल ने पदक तालिका में योगदान दिया।
इस प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि कई पदक अलग-अलग तरह की स्पर्धाओं से आए। कहीं व्यक्तिगत खिलाड़ियों ने पोडियम हासिल किया तो कहीं टीमों ने मिलकर भारत के लिए पदक जीते। इससे भारतीय दल की विविधता भी सामने आई।
अंतिम दौर में बढ़ीं पदक की उम्मीदें
एशियन गेम्स अभी समाप्त नहीं हुए हैं। 30 सितंबर को भी भारत के कई खिलाड़ियों और टीमों के मुकाबले निर्धारित हैं। शूटिंग, तीरंदाजी, कुश्ती, बॉक्सिंग, हॉकी और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ी मैदान में उतर रहे हैं। महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल में कोरिया का सामना करने वाली है, जबकि कुश्ती में निशा दहिया और सुनील कुमार जैसे खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश करेंगे।
यानी भारत की पदक यात्रा अभी जारी है। 29 सितंबर को मिले आठ पदकों ने भारतीय दल को एक ही दिन में बड़ी बढ़त दी और इसके बाद 30 सितंबर का कार्यक्रम भी पदक के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों की अब तक की यात्रा को देखें तो सबसे बड़ी बात यह सामने आती है कि अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी अपनी-अपनी स्पर्धाओं में मुकाबला करने की क्षमता दिखा रहे हैं। गुलवीर सिंह के तीन पदक, नीरू धांडा का ऐतिहासिक स्वर्ण, महिला 4x400 मीटर रिले की जीत, कबड्डी टीमों का दोहरा स्वर्ण और जेवलिन में दो पदक भारतीय अभियान के प्रमुख आकर्षण रहे हैं।
प्रतियोगिता अभी बाकी है और पदक तालिका में आने वाले दिनों में बदलाव संभव है। इसलिए अंतिम तस्वीर खेलों के समापन के बाद ही साफ होगी। फिलहाल भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से एशियन गेम्स में कई यादगार अध्याय जरूर जोड़ दिए हैं।