ईरान और अमेरिका के आपसी मतभेदों के चलते फरवरी से ही 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' चर्चा में है। इस दौरान कई घटनाएं सामने आई हैं, जैसे दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच आमने-सामने की झड़पें और कई ड्रोन गिराए जाने की घटनाएं।
इन आपसी मतभेदों का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। इससे पहले भी हमने देखा कि किस प्रकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने पाबंदी लगाई थी; हालांकि ईरान और भारत के बेहतर संबंधों के कारण भारतीय जहाजों को आवाजाही की अनुमति मिली, फिर भी कई भारतीय जहाजों को नुकसान पहुंचा था।
इसी क्रम में शुक्रवार को होर्मुज में एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ हालांकि वह भारतीय ध्वज वाला जहाज नहीं था लेकिन उस जहाज पर पांच भारतीय नाविक भी सवार थे। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को राहत भरी खबर साझा करते हुए बताया कि सभी 5 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस घटना ने समुद्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बताया जा रहा है कि ये भारतीय नाविक कुवैत के ध्वज वाले तेल टैंकर 'एमटी काज़िमाह III' (MT Kazimah III) पर सवार थे, जो कच्चा तेल लेकर अफ्रीका की ओर जा रहा था।
फरवरी से अब तक ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे 100 से ज्यादा नाविक प्रभावित हुए हैं और 11 भारतीय नाविकों की जान भी जा चुकी है।
क्षेत्र में जारी तनाव के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को जानकारी दी थी कि इस क्षेत्र में संचालित वाणिज्यिक जहाजों पर 4500 से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार इन नाविकों की सुरक्षा और जहाजों की स्थिति पर लगातार पैनी नज़र बनाए हुए है।
फिलहाल फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 6 जहाज मौजूद हैं, जबकि 6 अन्य विदेशी जहाज भी भारत के लिए माल ला रहे हैं। इन कुल 12 जहाजों पर 163 भारतीय नाविक तैनात हैं। उन्होंने पुष्टि की कि इन सभी जहाजों की निरंतर निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी खाड़ी क्षेत्र में तत्काल तनाव घटाने और संयम बरतने का आह्वान किया है। इसके बावजूद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव की स्थिति यथावत बनी हुई है और फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।